JHALU NIWASI, झालू निवासी
We have a group of Jhalu Niwasi with a membership of more than 650; https://www.facebook.com/groups/606109397405853
you may find the details about the group, its activities, postings and also about jhalu on this link;
हमारे पास झालू निवासी का एक समूह है जिसकी सदस्यता 650 से अधिक है; https://www.facebook.com/groups/606109397405853
आप इस लिंक पर समूह, इसकी गतिविधियों, पोस्टिंग और झालू के बारे में विवरण प्राप्त कर सकते हैं;https://www.facebook.com/photo/?fbid=1600815313334488&set=pcb.1600816060001080
वर्ष 1817 में बिजनौर जनपद की स्थापना हुई थीबिजनौर के कस्बा #झालू को बाबा झल्लर शाह ने सन 1796 मे बसाया था मुगल काल के अंत और ब्रिटिश काल के उद्भव समय में #झालू में ही बनियो कि रियासत, छतरी कि रियासत व जाट रियासत की भी स्थापना हो चुकी थी जिनके #अवशेष आज भी #झालू में विद्यमान है। #बनियो कि रियासत के नबाब व्रन्दावन व गोपीनाथ हिँदू मुस्लिम एकता के प्रतिक थे #झालू में अंग्रेज कमिश्नर की पत्नी मिशेल विँग पर मधुमक्खियों ने हमला बोल दिया था। उनकी हमले में मौत हो गई थी। झालू में आज भी उनकी की समाधि बनी है। अंतत: मुख्यालय बिजनौर ही बन गया।डिस्ट्रिक्ट गजेटियर के मुताबिक इससे पहले बिजनौर मुरादाबाद का हिस्सा था। सन 1817 में बिजनौर मुरादाबाद से अलग हुआ तो नाम मिला नार्थ प्रोविस ऑफ मुरादाबाद मुख्यालय बना नगीना इसके पहले कलक्टर बने मिस्टर बोसाकवेट उन्होंने अपना कार्यभार एनजे हैलहेड को सौंपा हैलहेड ने #नगीना से हटाकर बिजनौर को मुख्यालय बनाया।मुख्यालय नगीना से बिजनौर लाने का मुख्य कारण नगीना समय के अनुकूल नहीं था। एतिहासिक किताबो से पता चलता है कि बिजनौर को जनपद इसलिए चुना गया क्योंकि यह शहर मेरठ छावनी के नजदीक था जरूरत पड़ने पर कभी भी सेना को बिजनौर बुलाया जा सकता था।आप नगीना निवासी पुरानी कलेक्टरी को यो जानते होंगे जहां जनपद के पहले कलेक्टर का मुख्यालय हुआ करता था अब वह जगह खंडहर में तब्दील है।नगीना के बाद जनपद मुख्यालय की पहली पसंद अंग्रेजी हुकूमत के लिए कस्बा झालू था। बदनसीबी के कारण झालू जिला मुख्यालय नहीं बन सका। झालू में जहां राजकीय बालिका इंटर कॉलेज है, वहां से कुछ दूरी पर सहकारी समिति कार्यालय के पास अंग्रेज कमिश्नर का कैंप लगा था। केँप के दौरान अंग्रेज की पत्नी मिशेल विँग को आराम के लिए #झालू मुफीद लगा। उन्होंने अपने पति से #झालू को जिला बनाने की वकालत की। कमिश्नर इसके लिए तैयार हो गए थे। कमिश्नर की पत्नी एक पेड़ के नीचे आराम कर रही थीं। पेड़ पर मधुमक्खी का छत्ता लगा था। अंग्रेज की पत्नी को डिंगारा मधुमक्खी चिपट गईं। अंग्रेज की पत्नी वहां से भागीं। मधुमक्खियों ने उनका पीछा नहीं छोड़ा। इस दौरान कमिश्नर पति और उनके सिपहसालार भी उनकी मदद के लिए पहुंचे। थोड़ी देर बाद अंग्रेज कमिश्नर के पत्नी मिशेल विँग की मौत हो गई। कॉलेज से पहले यहां कमिश्नर के पत्नी की याद में समाधि बनी। समाधि आज भी मौजूद है। अंग्रेज कमिश्नर की पत्नी की मौत के बाद उनका झालू को जिला बनाने का इरादा बदल दिया। जिले में पांच तहसील थी। आजादी की लड़ाई में बास्टा क्षेत्र वालों के ज्यादा सक्रिय रहने पर अंग्रेज अफसरों ने इसे भंग कर दिया। बाद में 1986 में कांग्रेस ने चांदपुर तहसील बनाई। तत्कालीन मुख्यमंत्री वीर बहादुर सिंह ने इसकी आधारशिला रखी। बिजनौर जिले के कुछ इलाकों को बाद में हरिद्वार में शामिल कर दिया गया। पूर्व प्रकाशित सर्वाधिकार सुरक्षितप्रस्तुति--------;;;तैय्यब अलीSee Translation





Comments
Post a Comment